संसद के मानसून सत्र के पहले दिन जंतर–मंतर से संसद तक मार्च करने निकले हजारों छात्र बैरिकेड्स पर पुलिस से भिड़े, सोनम वांगचुक अब भी अस्पताल में भूख हड़ताल पर CJP
CJP प्रोटेस्ट: दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस — जानें ‘संसद चलो‘ मार्च की पूरी कहानी
संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन जंतर–मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे हजारों छात्रों को दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड्स पर रोका, इसके बाद आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज किया गया**
सोमवार, 20 जुलाई 2026 को दिल्ली की सड़कों पर एक बार फिर वही मंज़र दोहराया गया, जो बीते कुछ हफ्तों से देश भर की सुर्खियों में बना हुआ है। Cockroach Janta Party (CJP) के बैनर तले हजारों छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता जंतर–मंतर से संसद की ओर मार्च करने निकले। यह मार्च करीब एक महीने से चल रहे शांतिपूर्ण धरने का अगला और सबसे बड़ा कदम था, जिसे आयोजकों ने ‘संसद चलो‘ नाम दिया था।
आखिर मौके पर हुआ क्या?
रिपोर्ट्स के मुताबिक सुबह करीब 11:25 बजे प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग के पास लगे कई सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की। पुलिस का कहना है कि इसके बाद स्थिति बिगड़ी और धक्का–मुक्की जैसी स्थिति बनी, जिसमें दोनों तरफ के कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं। सुरक्षा बलों ने शास्त्री भवन के पास आंसू गैस के गोले छोड़े, वहीं संसद मार्ग पर बैटन–चार्ज (लाठीचार्ज) भी किया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक 10 से 15 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
घटनास्थल के कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुईं, जिनमें प्रदर्शनकारी और सुरक्षाबलों के बीच झड़प के दृश्य साफ दिख रहे हैं। एक वीडियो में एक लड़की सीनियर पुलिस अधिकारी से पूछती नज़र आई, “हम आपके बच्चे नहीं हैं क्या?” — यह क्लिप खासतौर पर वायरल हुई और कई लोगों की भावनाओं को छू गई।
CJP की तरफ से दावा किया गया कि पुलिस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए और यह कार्रवाई “अत्यधिक और अनावश्यक” थी। पार्टी का कहना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और कई छात्रों के सिर, हाथ व पैर में चोटें आईं। CJP ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यकर्ता गीतांजलि आंगमो (सोनम वांगचुक की पत्नी) के साथ बदसलूकी हुई। हालांकि इन दावों की घायलों की सटीक संख्या समेत स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने कुछ आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि कुछ दावे “पूरी तरह गलत” हैं। बता दें कि नई दिल्ली जिले में BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 163 के तहत पहले से ही निषेधाज्ञा लागू थी, जिसके तहत जंतर–मंतर के तय प्रदर्शन स्थल के अलावा कहीं और जुलूस, धरना या सभा की इजाज़त नहीं थी। पुलिस के अनुसार, संसद तक मार्च को कभी अनुमति नहीं दी गई थी।
मुद्दा क्या है — NEET पेपर लीक और परीक्षा सुधार की मांग
इस पूरे आंदोलन की जड़ में है परीक्षा प्रणाली को लेकर छात्रों का गुस्सा, खासकर 2026 में हुए कथित NEET पेपर लीक को लेकर। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें हैं:
– शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
– परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी और ठोस सुधार
– पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करना
आंदोलन को उस वक़्त और तेज़ी मिली जब जलवायु व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार, 18 जुलाई को उनके करीब 20-21 दिन लंबे अनशन के बाद जबरन अस्पताल ले जाया गया। वे फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं और वहीं से अपनी भूख हड़ताल जारी रखने की बात कह चुके हैं। उनके आग्रह पर ही CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी आज सुबह अपनी अलग भूख हड़ताल समाप्त की।
गौरतलब है कि CJP मई 2026 में शुरू हुई एक व्यंग्यात्मक (satirical) राजनीतिक पार्टी है, लेकिन बीते कुछ महीनों में इसे सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स मिल चुके हैं। शिक्षा और बेरोज़गारी को लेकर युवाओं के गुस्से को आवाज़ देने के चलते यह मौजूदा सरकार के सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनकर उभरा है।
दोनों तरफ की प्रतिक्रिया
राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
विपक्ष की ओर से:
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने छात्रों पर लाठीचार्ज को “लोकतंत्र पर सीधा हमला” बताया। प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार को छात्रों से बातचीत करनी चाहिए थी, आंसू गैस का इस्तेमाल करने के बजाय। DMK नेता उदयनिधि स्टालिन ने भी पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की और पार्टी की दशक भर पुरानी मांग दोहराई कि NEET परीक्षा को पूरी तरह खत्म किया जाए। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार पर “सबसे अधिनायकवादी” रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
सरकार और पुलिस की ओर से
दिल्ली पुलिस ने साफ किया कि CJP नेता अभिजीत दिपके को न तो हिरासत में लिया गया और न ही गिरफ्तार किया गया — यह दावा CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने खुद बाद में स्वीकार भी किया। इस बीच CJP प्रतिनिधियों अशुतोष रांका और सौरव दास ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं, जिन्होंने मांगों की समीक्षा के लिए कुछ समय मांगा है। वहीं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की।
दिल्ली में असर
प्रदर्शन के मद्देनज़र दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने एहतियातन राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ जैसे कई स्टेशन बंद कर दिए। केंद्रीय दिल्ली के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं भी बाधित रहीं। भारी पुलिस बल और सुरक्षा बैरिकेडिंग के चलते इलाके में दिनभर अफरा–तफरी का माहौल रहा।
आगे क्या?
CJP ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा सुधार को लेकर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा। इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट में सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो की एक याचिका पर भी जल्द सुनवाई होनी है, जिससे आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।
यह आंदोलन सिर्फ एक शहर या एक वर्ग तक सीमित नहीं रहा — महाराष्ट्र से लेकर अरुणाचल तक, देश के कोने–कोने से लोग इसमें शामिल हुए हैं, बिना किसी जाति या धर्म के भेद के। यही वजह है कि यह मुद्दा सिर्फ एक परीक्षा प्रणाली की खामी भर नहीं रह गया, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़ा एक व्यापक राष्ट्रीय सवाल बन चुका है।
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