
भारतीय रेलवे के इतिहास में आज एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से जींद-सोनीपत रेलखंड पर देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित यात्री ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ऐतिहासिक क्षण के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन ऊर्जा से संचालित यात्री रेल सेवा उपलब्ध है।
कैसे काम करती है यह ट्रेन?
यह ट्रेन पारंपरिक डीजल या बिजली से चलने वाली ट्रेनों से बिल्कुल अलग तकनीक पर आधारित है, जो इसे पर्यावरण के लिहाज से बेहद खास बनाती है।
- यह ट्रेन हाइड्रोजन से खुद बिजली बनाकर चलती है, यानी इसे बाहरी बिजली स्रोत की जरूरत नहीं पड़ती।
- संचालन के दौरान इससे न तो धुआं निकलता है और न ही कार्बन उत्सर्जन होता है — केवल जलवाष्प और हल्की गर्मी बाहर निकलती है।
- इस ट्रेन की यात्री क्षमता करीब 2,600 है, जो इसे एक बड़ी और व्यावहारिक ग्रीन ट्रांसपोर्ट परियोजना बनाती है।
- जींद में देश का सबसे बड़ा रेलवे हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग स्टेशन भी स्थापित किया गया है।
हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग स्टेशन की खासियत
इस पूरी परियोजना की रीढ़ जींद में बना हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग स्टेशन है, जहां इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक की मदद से हाइड्रोजन गैस तैयार की जाती है।
- इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के जरिए पानी से हाइड्रोजन गैस अलग की जाती है।
- इस गैस को 500 बार दबाव पर संपीड़ित कर 350 बार के दबाव पर ट्रेन में भरा जाता है।
- यह पूरी तकनीक भारत में स्वदेशी रूप से विकसित की गई है, जो ‘मेक इन इंडिया’ मिशन को भी मजबूत करती है।
- यह स्टेशन आने वाले समय में अन्य हाइड्रोजन रूट्स के लिए भी मॉडल का काम करेगा।
कार्यक्रम की भव्य तैयारियां
इस ऐतिहासिक अवसर के लिए हरियाणा में जबरदस्त तैयारियां की गई थीं। जींद के एकलव्य स्टेडियम में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री ने करीब 14,700 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का भी शुभारंभ किया।
- राज्य सरकार ने इस मौके को आधुनिक भारत की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया।
- हरियाणा के हर जिले में इस कार्यक्रम को लेकर विशेष आयोजन किए गए।
- पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को ई-वाहनों के जरिए कार्यक्रम स्थल तक लाया गया।
- सरकार ने इसे विकास और पर्यावरण संतुलन का प्रतीक बताया।
भारत के ग्रीन एनर्जी मिशन को मिलेगी नई ताकत
यह हाइड्रोजन ट्रेन भारत के व्यापक ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश को हाइड्रोजन ऊर्जा उत्पादन और उपयोग में वैश्विक अग्रणी बनाना है।
- यह पहल भारत के 2070 तक नेट-जीरो कार्बन एमिशन के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगी।
- रेलवे मंत्रालय की योजना है कि सफल परीक्षण के बाद इस तकनीक को अन्य रूट्स पर भी विस्तारित किया जाए।
- इससे न सिर्फ प्रदूषण कम होगा, बल्कि आयातित ईंधन पर निर्भरता भी घटेगी।
- विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना भारत को हाइड्रोजन तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
निष्कर्ष

