अभिजीत दीपके — डिजिटल कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजिस्ट से लेकर एक वायरल राजनीतिक आंदोलन के चेहरे तक का सफर
एक साधारण डिजिटल स्ट्रैटेजिस्ट कैसे बना भारत के जेन-ज़ी की आवाज़ — अभिजीत दीपके के जन्म से लेकर आज तक का सफर, उपलब्धियां और आगे की योजना
भूमिका: एक ट्वीट से शुरू हुई क्रांति
साल 2026 की मई में भारत के राजनीतिक परिदृश्य में एक ऐसा नाम उभरा, जिसने रातोंरात सोशल मीडिया की दुनिया हिला दी — अभिजीत दीपके। एक साधारण से सवाल “अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो?” ने कुछ ही घंटों में लाखों युवाओं को एकजुट कर दिया। यही सवाल आगे चलकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janta Party – CJP) नाम के एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन में बदल गया, जिसने कुछ ही दिनों में इंस्टाग्राम पर सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी के फॉलोअर्स को भी पीछे छोड़ दिया।
आखिर कौन हैं अभिजीत दीपके? कहां से आते हैं? उन्होंने क्या हासिल किया और आगे उनका क्या प्लान है? आइए विस्तार से जानते हैं।
अभिजीत दीपके का जन्म और शुरुआती जीवन
अभिजीत दीपके का जन्म 29 सितंबर 1995 को महाराष्ट्र के औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) शहर में हुआ था। वे मराठवाड़ा क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं और महार उपजाति से आते हैं — वही समुदाय जिससे संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर भी संबंध रखते थे। अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक की डिग्री हासिल की।
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भारतीय राजनीति और डिजिटल कम्युनिकेशन के क्षेत्र में अपना करियर बनाना शुरू किया। साल 2020 से 2023 के बीच उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम के साथ स्वयंसेवक के तौर पर काम किया। इस दौरान 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में उन्होंने युवा मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए मीम-आधारित डिजिटल कंटेंट तैयार किया, जो उस चुनावी अभियान का अहम हिस्सा बना। साथ ही उन्होंने दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग के लिए कम्युनिकेशन एडवाइजर के रूप में भी काम किया।
2023 में उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए AAP छोड़ दिया और अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत कैसे हुई?
15 मई 2026 को भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स की तुलना “कॉकरोच” और “समाज के परजीवी” (parasites of society) से कर दी। हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा फर्जी डिग्री लेकर वकालत करने वालों की ओर था, लेकिन तब तक यह टिप्पणी देशभर के युवाओं के बीच आक्रोश की वजह बन चुकी थी।
अभिजीत दीपके ने इस “अपमान” को एक हथियार में बदलने का फैसला किया। 16 मई 2026 को उन्होंने X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट किया — “अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो क्या होगा?” — और कुछ ही घंटों में यह पोस्ट वायरल हो गई। इसके बाद उन्होंने एक साधारण वेबसाइट और साइन-अप फॉर्म के साथ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) लॉन्च कर दी, जिसका टैगलाइन था — “Voice of the Lazy & Unemployed”।
पहले 24 घंटों में ही 50,000 लोगों ने इस मूवमेंट से जुड़ने के लिए साइन-अप किया, और पांच दिनों के भीतर यह आंकड़ा 10 लाख को पार कर गया।
तेज़ी से बढ़ती लोकप्रियता और उपलब्धियां
अभिजीत दीपके की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उन्होंने बेहद सीमित संसाधनों में, बिना किसी पेशेवर टीम के, केवल AI टूल्स (जैसे Claude और ChatGPT) की मदद से एक पूरा राजनीतिक ब्रांड खड़ा कर दिया। उन्होंने खुद बताया कि उनके पास इतनी बड़ी डिजिटल कैंपेन डिज़ाइन करने के लिए न तो पैसा था और न ही कोई प्रोफेशनल टीम, इसलिए उन्होंने पूरी तरह AI पर भरोसा किया।
कुछ प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं:
- 78 घंटों के भीतर इंस्टाग्राम पर 30 लाख फॉलोअर्स
- 5 दिनों के भीतर 1 करोड़ फॉलोअर्स — जो बीजेपी के आधिकारिक हैंडल से भी ज़्यादा हो गए
- 22 मई 2026 तक 2 करोड़ से ज़्यादा इंस्टाग्राम फॉलोअर्स
- X पर 2 लाख से ज़्यादा फॉलोअर्स और 3.5 लाख से अधिक रजिस्टर्ड सदस्य
- पार्टी का एक विस्तृत पांच-सूत्रीय घोषणापत्र (मैनिफेस्टो) जारी किया, जिसमें न्यायपालिका की जवाबदेही, महिला आरक्षण बढ़ाने, मीडिया घरानों की स्वतंत्रता, और दलबदल विरोधी सख्त कानून जैसे मुद्दे शामिल थे
इस मूवमेंट को कई बड़ी हस्तियों का समर्थन भी मिला — पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक, वकील-कार्यकर्ता प्रशांत भूषण, समाजसेवी अन्ना हजारे, कांग्रेस सांसद शशि थरूर, टीएमसी नेता ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी, फिल्मकार अनुराग कश्यप, कॉमेडियन कुणाल कामरा और यूट्यूबर ध्रुव राठी जैसे नाम शामिल हैं।
कैप्शन: CJP का डिजिटल अभियान — बेरोजगारी, परीक्षा घोटालों और युवाओं की आवाज़ को लेकर उठा बड़ा आंदोलन
विवाद और चुनौतियां
जैसे-जैसे यह मूवमेंट बढ़ता गया, वैसे-वैसे इसे विरोध और कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। मई 2026 के अंत में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने “राष्ट्रीय सुरक्षा” का हवाला देते हुए CJP के X अकाउंट को भारत में ब्लॉक करवा दिया। इसके तुरंत बाद दीपके ने नए हैंडल “Cockroach is Back” से वापसी की और दिल्ली हाईकोर्ट में इस ब्लॉकिंग को चुनौती भी दी।
केंद्रीय मंत्रियों ने भी इस मूवमेंट पर सवाल उठाए — कुछ ने दावा किया कि इसके फॉलोअर्स का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान से है, जिसे दीपके ने डेटा के साथ खारिज कर दिया। इसके अलावा साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी दी कि CJP के नाम से एक फर्जी और मैलवेयर-युक्त एंड्रॉइड ऐप भी फैलाया जा रहा था। दीपके ने यह भी बताया कि उन्हें व्हाट्सएप पर जान से मारने की धमकियां मिलीं।
जून 2026 में CJP ने NEET पेपर लीक और CBSE ऑन-स्क्रीन मार्किंग विवाद को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू किए, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित अनिश्चितकालीन धरना इस आंदोलन का एक बड़ा मोड़ साबित हुआ।
अभिजीत दीपके का अगला प्लान क्या है?
अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि CJP का मकसद पारंपरिक राजनीतिक पार्टी बनना नहीं है, न ही वे स्थापित राजनेताओं को इस प्लेटफॉर्म में शामिल करना चाहते हैं। उनका कहना है कि जेन-ज़ी को यह पसंद नहीं आएगा अगर मौजूदा राजनेता CJP से जुड़ें।
आगे की योजना में शामिल हैं:
- शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर लगातार दबाव बनाना
- रोज़गार और बेरोज़गारी भत्ते को लेकर “राइट टू एम्प्लॉयमेंट” कानून की मांग उठाना
- देशभर में जमीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शन और सामाजिक अभियान जारी रखना
- पारदर्शिता के लिए पार्टी को खुद RTI एक्ट के दायरे में लाना
