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PM मोदी के 25 साल: Indian Politics में सुशासन की नई परिभाषा

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Politics से जुड़े ताज़ा घटनाक्रम पर विशेष संपादकीय रिपोर्ट: # ‘तुष्टीकरण का अंत, सुशासन का युग’: PM मोदी के ऐतिहासिक 25 साल पर अमित शाह का बड़ा बयान, जानिए कैसे बनी ‘परफॉरमेंस की राजनीति’ नए भारत की पहचान

भारतीय राजनीति के समकालीन इतिहास में 7 अक्टूबर की तारीख एक असाधारण मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो चुकी है। आज से ठीक पच्चीस वर्ष पहले—7 अक्टूबर 2001 को—नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर एक निर्वाचित सरकार के मुखिया के रूप में अपनी यात्रा की शुरुआत की थी। उस समय वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे और न ही उनके पास सरकार चलाने का कोई पूर्व अनुभव था। लेकिन उस दिन से लेकर आज तक, उन्होंने राज्य से केंद्र तक बिना रुके, बिना थके 25 वर्षों तक निर्वाचित सरकार के मुखिया के रूप में देश का नेतृत्व किया है।

इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के निरंतर शासनकाल पर एक विस्तृत और महत्वपूर्ण बयान जारी किया। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय राजनीति से तुष्टीकरण, जातिवाद और वंशवाद के दशकों पुराने ढर्रे को उखाड़ फेंकते हुए ‘परफॉरमेंस की राजनीति’ (Politics of Performance) को देश की नई कार्यसंस्कृति बना दिया है। यह सिर्फ एक राजनीतिक दल की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि जब नीतियां ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से बनती हैं, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कैसे बदलती है।


Politics: 7 अक्टूबर 2001 से 2026: एक अकल्पनीय प्रशासनिक सफर

इस संदर्भ में Politics के प्रभाव और तथ्यों का निष्पक्ष विश्लेषण महत्वपूर्ण है।

अमित शाह ने अपने वक्तव्य में याद दिलाया कि 2001 में जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात की कमान संभाली थी, तब राज्य विनाशकारी भूकंप, गंभीर सूखे और आर्थिक अनिश्चितता के दौर से जूझ रहा था। उस संकट काल से गुजरात को उबारकर एक औद्योगिक महाशक्ति और ‘वाइब्रेंट गुजरात’ मॉडल में बदलना उनकी प्रशासनिक क्षमता की पहली परीक्षा थी।


अमित शाह का मुख्य संदेश: ‘परफॉरमेंस की राजनीति’ क्या है?

इस संदर्भ में Politics के प्रभाव और तथ्यों का निष्पक्ष विश्लेषण महत्वपूर्ण है।

गृह मंत्री अमित शाह ने अपने विश्लेषण में रेखांकित किया कि 2014 से पहले भारतीय राजनीति का केंद्र बिंदु क्या हुआ करता था—जातीय समीकरण, वोट बैंक का तुष्टीकरण और चुनावी वादे जो कभी पूरे नहीं होते थे।

अमित शाह के अनुसार, पीएम मोदी ने इस व्यवस्था को तीन बुनियादी सिद्धांतों पर बदल दिया:

  1. जवाबदेही और परिणाम (Accountability & Delivery): अब राजनीति इस बात पर नहीं होती कि आपने क्या वादा किया, बल्कि इस बात पर होती है कि आपने धरातल पर क्या डिलीवर किया। जिस परियोजना का शिलान्यास होता है, उसका उद्घाटन भी उसी कार्यकाल में तय समय पर सुनिश्चित किया जाता है।
  2. बिचौलियों और भ्रष्टाचार का अंत: डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और डिजिटल इंडिया के माध्यम से सरकारी खजाने से निकलने वाला शत-प्रतिशत पैसा सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचना शुरू हुआ। इसने व्यवस्थागत भ्रष्टाचार की कमर तोड़ दी।
  3. ‘तुष्टीकरण नहीं, सबका सशक्तिकरण’: बिना किसी भेदभाव के हर नागरिक तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना ही वास्तविक धर्मनिरपेक्षता और सुशासन है।

25 वर्षों के शासन की 5 ऐतिहासिक उपलब्धियां

अमित शाह ने उन प्रमुख नीतिगत फैसलों और उपलब्धियों का उल्लेख किया जिन्होंने भारत के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को नई मजबूती दी है:

1. 25 करोड़ लोगों का गरीबी से बाहर निकलना

नीति आयोग और बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के आंकड़ों का हवाला देते हुए शाह ने कहा कि पिछले एक दशक में 25 करोड़ से अधिक भारतीयों को बहुआयामी गरीबी के दलदल से बाहर निकाला गया। पक्के मकान (पीएम आवास योजना), हर घर नल से जल, उज्ज्वला गैस कनेक्शन और आयुष्मान भारत के तहत ₹5 लाख का मुफ्त स्वास्थ्य सुरक्षा कवच गरीबों के जीवन में स्थायित्व लेकर आया।

2. दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

2014 में भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक पायदान पर 10वें स्थान पर थी और ‘फ्रेजाइल फाइव’ (कमजोर अर्थव्यवस्थाओं) में गिनी जाती थी। आज भारत 5वीं सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बन चुका है और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में 2047 तक ‘विकसित भारत’ की ओर अग्रसर है।

3. राष्ट्रीय सुरक्षा पर शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance)

गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के मोर्चे पर जो निर्णायक कदम पीएम मोदी के नेतृत्व में उठाए गए, वे अभूतपूर्व हैं:

4. सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय गौरव

अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम और उज्जैन महाकाल लोक का पुनरुद्धार, और वैश्विक स्तर पर योग और आयुर्वेद की पुनर्स्थापना ने भारतीय सभ्यतागत गौरव को विश्व मंच पर पुनर्जीवित किया।

5. डिजिटल क्रांति और स्पेस टेक्नोलॉजी

यूपीआई (UPI) के जरिए दुनिया के 45% से अधिक रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन आज भारत में हो रहे हैं। चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक लैंडिंग और गगनयान मिशन ने भारत को अंतरिक्ष तकनीक की अग्रिम पंक्ति में लाकर खड़ा कर दिया है।


शासन व्यवस्था में आया बदलाव: तुलनात्मक दृष्टि

पहलू 2014 से पूर्व की राजनीति मोदी शासनकाल: ‘परफॉरमेंस की राजनीति’
चुनावी आधार जातिवाद, वंशवाद और वोट बैंक तुष्टीकरण विकास के कार्य, पारदर्शी डिलीवरी और रिपोर्ट कार्ड
कल्याणकारी योजनाएं कागजों पर सीमित, बिचौलियों द्वारा भारी रिसाव (Leakage) डीबीटी (DBT) के जरिए सीधे बैंक खातों में 100% लाभ
विदेश व रक्षा नीति कूटनीतिक झिझक, हमलों पर केवल कड़े निंदा प्रस्ताव राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि, आतंकवाद पर घर में घुसकर प्रहार
अवसंरचना निर्माण धीमी गति, दशकों तक लटकी रहने वाली परियोजनाएं गति शक्ति मॉडल, प्रतिदिन रिकॉर्ड राजमार्ग और आधुनिक वंदे भारत ट्रेनें

अमित शाह का संदेश: “यह यात्रा का पड़ाव है, पूर्ण विराम नहीं”

अपने बयान के अंतिम हिस्से में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के शासन के यह 25 वर्ष केवल पीछे मुड़कर उपलब्धियां गिनने का अवसर नहीं हैं, बल्कि यह आगे के बड़े लक्ष्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने कहा:

“यह 25 वर्ष नरेंद्र मोदी जी की राष्ट्र सेवा यात्रा का एक भव्य पड़ाव हैं, कोई पूर्ण विराम नहीं। उन्होंने 140 करोड़ देशवासियों के मन में यह विश्वास जगाया है कि भारत 2047 तक हर क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। ‘जनसेवा ही प्रभुसेवा’ का यह संकल्प आने वाले दशकों में भारत को आत्मनिर्भर और परम वैभवशाली राष्ट्र बनाएगा।”


निष्कर्ष

नरेंद्र मोदी का 2001 से 2026 तक का राजनीतिक और प्रशासनिक जीवन आधुनिक लोकतंत्र के लिए एक अध्ययन का विषय है। बिना किसी राजनीतिक पारिवारिक पृष्ठभूमि के एक साधारण कार्यकर्ता से उठकर 25 वर्षों तक लगातार निर्वाचित सरकार का सफल नेतृत्व करना उनकी राजनीतिक दृढ़ता और जनता के अटूट विश्वास को दर्शाता है।

अमित शाह का यह बयान स्पष्ट करता है कि भारतीय राजनीति का केंद्र बिंदु अब स्थायी रूप से बदल चुका है। अब चुनाव जीतने के लिए भावनात्मक नारों की नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाए गए ‘परफॉरमेंस’ की आवश्यकता होती है—और यही नए भारत की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकत बन चुकी है।

स्रोत: PTI, सरकारी विज्ञप्ति, राष्ट्रीय एवं स्थानीय रिपोर्ट्स

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