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जंतर मंतर से पटना तक छात्र आंदोलन तेज: NEET पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, पटना में हिंसक झड़प |

जंतर मंतर पर NEET पेपर लीक को लेकर छात्र आंदोलन और पटना में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हिंसक प्रदर्शन की पूरी जानकारी पढ़ें।

जंतर मंतर, नई दिल्ली में NEET पेपर लीक को लेकर छात्रों का प्रदर्शन

जंतर मंतर से पटना तक छात्र आंदोलन तेज: NEET पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, पटना में हिंसक झड़प |

देश भर के छात्र इन दिनों सड़कों पर हैं। दिल्ली के जंतर मंतर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब बिहार की राजधानी पटना तक पहुंच चुका है, जहां बुधवार को पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच सीधी झड़प देखने को मिली। मामला जुड़ा है NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं से, जिसे लेकर छात्र संगठन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह पूरा मामला है क्या और अब तक क्या-क्या हुआ है।

जंतर मंतर पर आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई

इस आंदोलन की जड़ें कुछ हफ्तों पुरानी हैं। 2026 में दो परीक्षा संबंधी विवादों के बाद यह प्रदर्शन शुरू हुआ – एक तरफ NEET-UG मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सवालों के पेपर लीक होने का मामला सामने आया, तो दूसरी तरफ CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ियों के चलते हजारों छात्र अपने अंतिम नतीजों के इंतजार में फंसे रह गए। इसी असंतोष ने आगे चलकर एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले लिया।

इस मुहिम की अगुवाई कर रही है युवाओं की अगुवाई वाली संस्था Cockroach Janta Party (CJP)। यह प्रदर्शन जून-जुलाई 2026 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ, जिसका मुख्य केंद्र मेडिकल पढ़ाई की योग्यता परीक्षाओं के साथ-साथ स्कूल बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े विवाद रहे। गौरतलब है कि हर साल करीब 20 लाख छात्र NEET परीक्षा में बैठते हैं, जबकि सीटें सिर्फ करीब 1 लाख 30 हजार ही उपलब्ध हैं, जिससे इस परीक्षा का दबाव और महत्व दोनों ही बेहद ज्यादा है।

आंदोलन में एक बड़ा मोड़ तब आया जब जाने-माने पर्यावरणविद और इंजीनियर सोनम वांगचुक भी इसमें शामिल हो गए। उन्होंने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के छह छात्रों के साथ मिलकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग रखी। इससे यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया।

20 जुलाई: ‘संसद चलो’ मार्च और झड़प

मानसून सत्र की शुरुआत के दिन ही यानी 20 जुलाई 2026 को इस आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया। हजारों छात्र, युवा कार्यकर्ता और समर्थक दिल्ली के जंतर मंतर पर संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन ही जमा हुए। प्रदर्शनकारियों ने काले कपड़े पहने, काले झंडे और बैनर लेकर छात्रों के लिए न्याय की मांग की। यह पूरा अभियान ‘संसद चलो’ नाम से जाना गया, जिसमें देश भर से लोगों को दिल्ली बुलाया गया था।

आयोजकों ने इसे शांतिपूर्ण मार्च बताया था, लेकिन पुलिस का कहना था कि इस तरह के मार्च की कोई अनुमति नहीं दी गई थी। यहीं से हालात बिगड़ने शुरू हुए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प के बाद यह प्रदर्शन हिंसक हो गया। खबरों के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की, जिसमें 50 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। इस घटना ने पूरे मामले को एक बड़ा राजनीतिक विवाद बना दिया, और यह सवाल भी उठने लगे कि क्या यह वाकई सिर्फ छात्रों का आंदोलन था या इसमें कोई और तत्व भी शामिल हो गए।

इस पुलिस कार्रवाई के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया। बीजू जनता दल (BJD) प्रमुख नवीन पटनायक ने भी खुलकर इस्तीफे की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि छात्रों के इस्तीफे की मांग को लेकर कई दलों से मांग आ चुकी है, और युवाओं को लगी गंभीर चोटों को देखते हुए उनका भी मानना है कि शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।

अगले दिन यानी 21 जुलाई को देश के कई शहरों में विरोध और तेज हो गया। विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और कार्यकर्ताओं ने NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देश भर में व्यापक प्रदर्शन किए, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई गई। पटना, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों में छात्र संगठनों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए, और कई जगह कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया।

पटना में बुधवार को हिंसक हुआ प्रदर्शन

दिल्ली की घटना के दो दिन बाद यानी 22 जुलाई 2026, बुधवार को यह आंदोलन बिहार की राजधानी पटना तक पहुंच गया, जहां हालात और गंभीर हो गए। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के बैनर तले छात्रों ने राजभवन की ओर मार्च निकाला, जो परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ आयोजित किया गया था।

पुलिस ने इस मार्च को गांधी मैदान के पास ही रोक दिया, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। बिहार पुलिस ने छात्र नेताओं के ‘लोक भवन मार्च’ को रोकने के लिए बुधवार को आंसू गैस के गोले छोड़े, पानी की बौछारें कीं और लाठीचार्ज भी किया। प्रदर्शनकारी गांधी मैदान से करीब तीन किलोमीटर दूर राज्यपाल के आवास के नजदीक पुलिस कार्रवाई का सामना करते नजर आए।

इस मार्च की अगुवाई कर रहे CPI(ML) लिबरेशन के विधायक और पूर्व AISA राष्ट्रीय महासचिव संदीप सौरव ने पुलिस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वे मोदी सरकार को होश में लाने के लिए सड़कों पर उतरे हैं, और उनकी मांग है कि जंतर मंतर प्रदर्शन के दमन के बाद न सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान बल्कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि दिल्ली पुलिस ने उन्हीं के निर्देश पर कार्रवाई की थी।

घटनास्थल पर तनाव सिर्फ राजभवन मार्च तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह जब राजभवन की ओर बढ़ रहा था, तभी सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें जेपी गोलंबर के पास, गांधी मैदान के करीब रोक दिया। कुछ छात्रों ने सड़क पर ही धरना दे दिया, जबकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उन्हें शांतिपूर्वक प्रदर्शन खत्म करने के लिए मनाते नजर आए। इसके बाद तनाव पटना के अन्य हिस्सों जैसे डाक बंगला चौराहा और गांधी मैदान तक फैल गया, जिसके चलते वहां अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

आखिर छात्रों की मांग क्या है ?

इस पूरे आंदोलन के केंद्र में एक ही मांग है — जवाबदेही। छात्र संगठनों का कहना है कि बार-बार होने वाले प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं के विवादों ने लाखों उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित किया है, और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों तथा मंत्रालय को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। पटना में प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें थीं:

विपक्ष लामबंद, सरकार का रुख

इस मुद्दे ने अब साफ तौर पर राजनीतिक रंग ले लिया है। कांग्रेस, CPI(ML) लिबरेशन, BJD जैसे विपक्षी दल लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं और संसद के भीतर व बाहर दोनों जगह सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं सरकार का कहना है कि प्रदर्शन की आड़ में हिंसा और तोड़फोड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और सुरक्षा एजेंसियां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा रही हैं। संसद के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठने की संभावना है, क्योंकि विपक्षी INDIA गठबंधन इसे लेकर पहले ही रणनीतिक बैठकें कर चुका है।

आगे क्या होगा ?

फिलहाल स्थिति यह है कि आंदोलन दिल्ली से निकलकर देश के कई और राज्यों तक फैल चुका है। पटना में हुई पुलिस कार्रवाई के बाद यह तय माना जा रहा है कि बिहार सहित अन्य राज्यों में विरोध प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं। छात्र संगठनों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी तरफ, यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस बढ़ते दबाव पर क्या रुख अपनाती है और मानसून सत्र में इस मुद्दे पर क्या चर्चा होती है।

यह मामला सिर्फ एक परीक्षा या एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की समूची परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन चुका है। आने वाले दिनों में इस आंदोलन की दिशा क्या होगी, इस पर सबकी नजर टिकी रहेगी।

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