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भारतीय मीडिया और मनोरंजन बाजार 2030: PwC Report on AI, OTT and Gaming Growth

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भारतीय मीडिया और मनोरंजन बाजार 2030 तक छुएगा $36.7 बिलियन का आंकड़ा: PwC रिपोर्ट

भारतीय मीडिया और मनोरंजन (M&E) उद्योग आने वाले वर्षों में एक अभूतपूर्व क्रांति का गवाह बनने जा रहा है। वैश्विक कंसल्टेंसी फर्म पीडब्ल्यूसी (PwC) की नवीनतम आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन गेमिंग के दम पर भारत का मीडिया बाजार साल 2030 तक 36.7 बिलियन डॉलर (लगभग 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक) तक पहुंच सकता है।

यह रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत में इंटरनेट की पैठ और स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग ने डिजिटल विज्ञापनों और प्रीमियम कंटेंट की मांग को तेजी से बढ़ाया है।

विकास के प्रमुख प्रेरक कारक (Key Drivers of Growth)

PwC की रिपोर्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि पारंपरिक मीडिया (जैसे प्रिंट और टीवी) की तुलना में डिजिटल मीडिया काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारक काम कर रहे हैं:

1. ओटीटी (OTT) और डिजिटल स्ट्रीमिंग का दबदबा

भारत में क्षेत्रीय भाषाओं (Regional Languages) में कंटेंट की बढ़ती मांग ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक पहुंचा दिया है। अब दर्शक केवल वैश्विक कंटेंट ही नहीं, बल्कि अपनी स्थानीय भाषा में उच्च गुणवत्ता वाली फिल्में और वेब सीरीज देखना पसंद कर रहे हैं।

2. ऑनलाइन गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स का क्रेज

युवा आबादी के बीच गेमिंग एक मुख्यधारा का मनोरंजन बन चुका है। भारत में गेमिंग केवल टाइमपास नहीं, बल्कि एक पेशेवर करियर और बड़े निवेश का क्षेत्र बन चुका है। स्वदेशी गेमिंग ऐप्स और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स ने इस क्षेत्र में पूंजी प्रवाह को काफी बढ़ा दिया है।

3. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और पर्सनलाइजेशन

कंटेंट क्रिएशन से लेकर यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने तक, AI की भूमिका अब अनिवार्य हो गई है। ओटीटी ऐप्स और विज्ञापनदाता अब एआई एल्गोरिदम का उपयोग करके उपयोगकर्ताओं को उनकी पसंद के अनुसार व्यक्तिगत (Personalized) सुझाव दे रहे हैं, जिससे जुड़ाव (Engagement) कई गुना बढ़ गया है।

डिजिटल विज्ञापन में भारी उछाल

रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में विज्ञापनों का एक बहुत बड़ा हिस्सा डिजिटल मीडिया की तरफ स्थानांतरित हो जाएगा। पारंपरिक टेलीविजन विज्ञापनों की तुलना में ब्रांड्स अब सोशल मीडिया, यूट्यूब और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापन देना अधिक पसंद कर रहे हैं क्योंकि यहां लक्षित दर्शकों (Target Audience) तक पहुंचना आसान और अधिक सटीक होता है।

| क्षेत्र (Sector) | अनुमानित प्रभाव (2030 तक) |

| डिजिटल विज्ञापन | विज्ञापनों में 50% से अधिक की हिस्सेदारी डिजिटल की होगी |
| गेमिंग | टियर-2 और टियर-3 शहरों से सबसे अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद |
| ओटीटी | सब्सक्रिप्शन-आधारित मॉडल (SVOD) में लगातार बढ़ोतरी |

चुनौतियां और दूसरा पहलू

जहां एक तरफ यह विकास भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक है, वहीं इसके कुछ नकारात्मक और चुनौतीपूर्ण पहलू भी हैं:
* डेटा गोपनीयता (Data Privacy): एआई और व्यक्तिगत विज्ञापनों के बढ़ते उपयोग के कारण उपयोगकर्ताओं के डेटा की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
* कंटेंट की गुणवत्ता और सेंसरशिप: ओटीटी पर परोसे जाने वाले कंटेंट को लेकर नियामक संस्थाओं और दर्शकों के बीच अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती है।
* डिजिटल विभाजन (Digital Divide): हालांकि इंटरनेट तेजी से फैल रहा है, लेकिन अभी भी ग्रामीण इलाकों में हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है।

निष्कर्ष के तौर पर, भारत का मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र एक डिजिटल-प्रथम (Digital-First) भविष्य की ओर बढ़ रहा है। सरकार की नीतियां और बुनियादी ढांचे का विकास इस गति को और तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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