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“मैं शहीद होना चाहता था”: फ्लाईदुबई फ्लाइट FZ1073 को इजरायल में क्रैश कराना चाहता था को-पायलट, सुरक्षा एजेंसियां सन्न

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फ्लाईदुबई (Flydubai) की फ्लाइट FZ1073 में हवा में विमान को क्रैश कराने की खौफनाक साजिश को लेकर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। 34,000 फीट की ऊंचाई पर विमान के मुख्य पायलट पर जानलेवा हमला करने वाले को-पायलट ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया है कि वह विमान को इजरायल के किसी बड़े ठिकाने से टकराकर पूरी तरह तबाह करना चाहता था और उसका अंतिम मकसद “शहीद होकर मरना” था।

इस कबूलनामे के सामने आते ही वैश्विक विमानन और खुफिया एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। इस खुलासे ने साफ कर दिया है कि 170 से अधिक मासूम जिंदगियों से भरा यह यात्री विमान 9/11 जैसे भीषण आत्मघाती हमले में तब्दील होने से बाल-बाल बचा।

34,000 फीट की ऊंचाई पर क्या हुआ था?

दुबई से तेल अवीव के लिए उड़ान भरने वाली फ्लाइट FZ1073 जब क्रूजिंग एल्टीट्यूड (लगभग 34,000 फीट) पर थी, तभी कॉकपिट के भीतर यह खूनी साजिश शुरू हुई:

पूछताछ में खौफनाक कबूलनामा: ‘मकसद था इजरायल में तबाही’

सऊदी अरब और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई सघन पूछताछ में आरोपी को-पायलट ने अपने इरादे खुलकर सामने रखे:

  1. ‘शहादत’ का उन्माद: पूछताछ के दौरान आरोपी ने साफ कहा कि उसका इरादा किसी भी कीमत पर जिंदा बचने का नहीं था। वह विमान को इजरायल के एक तय ठिकाने से टकराकर खुद को ‘शहीद’ के रूप में देखना चाहता था। काबू किए जाने के दौरान भी वह लगातार चिल्ला रहा था कि उसे मार दिया जाए।

  2. भू-राजनीतिक बदले की भावना: आरोपी ने जांचकर्ताओं को बताया कि वह पश्चिम एशिया और गाजा के संघर्ष से अत्यधिक प्रभावित था और इसी का बदला लेने के लिए उसने एक सिविल पैसेंजर विमान को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना बनाई।

  3. ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन: जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी लंबे समय से सोशल मीडिया और डार्क वेब पर चरमपंथी और आत्मघाती विचारधारा से जुड़ी सामग्री देख रहा था।

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के सामने खड़े 3 बड़े सवाल

इस घटना ने दुनिया भर के एयरपोर्ट और एयरलाइंस सुरक्षा तंत्र की कमियों को उजागर कर दिया है:

जांबाजी ने टाला इतिहास का बड़ा विमान हादसा

यदि घायल मुख्य पायलट ने उस नाजुक मोड़ पर कॉकपिट का दरवाजा न खोला होता और यात्रियों ने त्वरित बहादुरी न दिखाई होती, तो यह साजिश हवा में ही सैकड़ों मासूमों की मौत का कारण बन जाती।

यह घटना पूरी दुनिया के विमानन क्षेत्र के लिए एक बड़ा सबक है कि सुरक्षा केवल यात्रियों के सामान और बॉडी स्कैन तक सीमित नहीं रह सकती। कॉकपिट के भीतर बैठे लोगों की वैचारिक और मानसिक पृष्ठभूमि पर भी उतनी ही कड़ी और निरंतर निगरानी रखनी होगी, ताकि भविष्य में आसमान में ऐसा कोई दूसरा खूनी खेल न खेला जा सके।

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