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CCEA ने दी बिहार में NH-22 के फोर-लेनिंग को मंजूरी, 5,847 करोड़ रुपये होंगे खर्च

CCEA ने दी बिहार में NH-22 के फोर-लेनिंग को मंजूरी, 5,847 करोड़ रुपये होंगे खर्च

केंद्र सरकार ने बिहार में सड़क अवसंरचना को मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) की बैठक में मुज़फ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा नेशनल हाईवे-22 के 82.578 किलोमीटर लंबे हिस्से को फोर-लेन स्टैंडर्ड में अपग्रेड करने की मंजूरी दी गई है। इस परियोजना पर करीब 5,847 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

यह फैसला बिहार में कनेक्टिविटी बढ़ाने और सीमावर्ती क्षेत्रों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने की सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं

सरकारी बयान के अनुसार, इस कॉरिडोर को हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के तहत विकसित किया जाएगा। इस मॉडल में निर्माण की लागत का एक हिस्सा सरकार और शेष निजी विकासकर्ता द्वारा वहन किया जाता है, जिससे परियोजनाओं को तेज़ी से पूरा करने में मदद मिलती है।

इस हाईवे की कुछ प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:

अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी

इसी बैठक में सरकार ने देश के अन्य हिस्सों में रेलवे लाइनों के विस्तार से जुड़ी कई परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इनमें शामिल हैं:

सरकार का कहना है कि रेल नेटवर्क के इस विस्तार से माल ढुलाई क्षमता में इज़ाफा होगा और औद्योगिक क्षेत्रों तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

राष्ट्रपति की स्वीकृति

इसी सप्ताह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कराधान एवं अन्य विधि (संशोधन) अधिनियम, 2026 और भुगतान एवं निपटान प्रणाली (संशोधन) अधिनियम को भी अपनी स्वीकृति प्रदान की है। इन कानूनी संशोधनों से कराधान प्रणाली और डिजिटल भुगतान ढांचे में बदलाव का रास्ता साफ हो गया है।

अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम

राष्ट्रीय स्तर पर इसी सप्ताह कई अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियां भी हुईं:

विशेषज्ञों की राय

नीति विश्लेषकों का मानना है कि बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए ज़रूरी है। विशेष रूप से बिहार जैसे राज्यों में, जहां सड़क कनेक्टिविटी लंबे समय से एक चुनौती रही है, इस तरह की परियोजनाएं रोज़गार सृजन और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती हैं।

हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि हाइब्रिड एन्युटी मोड परियोजनाओं के क्रियान्वयन में समय-सीमा का पालन एक महत्वपूर्ण चुनौती रहा है, और इसलिए परियोजना की प्रगति पर करीबी निगरानी आवश्यक होगी।

निष्कर्ष

केंद्र सरकार का यह ताज़ा फैसला बिहार सहित पूर्वी भारत में कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सड़क और रेल दोनों क्षेत्रों में हुई घोषणाएं यह संकेत देती हैं कि सरकार अगले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय संपर्क सुधार पर विशेष ज़ोर दे रही है। आने वाले महीनों में इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति पर सबकी नज़र रहेगी।

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